Rochak Stories
मोहब्बत की खातिर बनाई गई हूं,
दहेज की खातिर जलाई गई ।
मैं परदे से महफिल में लाई गई हूं,
मैं औरों की खातिर बनाई गई हूं ।
उठाती में उंगली कैसे किसी पर,
मैं सबकी नजर में गिराई गई हूं ।
मैं अपनी मर्जी की मालिक नहीं हूं,
मैं कठपुतली की तरह नचाई गई हूं ।
मिला है सिला मोहब्बत का मुझको,
कि महलों के कोठों पर लाई गई हूं ।
उसी ने मुझ को दाव पर लगाया,
जिसकी खातिर मैं बनाई गई हूं ।
किसी ने न समझा मेरी जिंदगी को,
चटाई समझकर बिछाई गई हूं ।
पड़ी जब मेरी जरूरत किसी को,
मैं सोते से अक्सर जगाई गई हूं ।
मेरे दम कदम से है खुशियां तुम्हारी,
मैं खुशियों के खातिर जलाई गई हूं ।
उठा न सकी कभी मैं सर ही अपना,
लड़कपन में इतना झुकाई गई हूं ।
किया जब भी मैंने तकाजा वफा का,
तो शौहर के हाथों पिटाई गई हूं ।
तुम्हारी खताओं के बदले अक्सर,
मैं बलि का बकरा बनाई गई हूं ।
खता क्या है मेरी आंसू बताओ,
जमाने में अक्सर सताई गई हूं ।
मोहब्बत की खातिर बनाई गई हूं,
दहेज की खातिर जलाई गई ।
मैं परदे से महफिल में लाई गई हूं,
मैं औरों की खातिर बनाई गई हूं ।
उठाती में उंगली कैसे किसी पर,
मैं सबकी नजर में गिराई गई हूं ।
मैं अपनी मर्जी की मालिक नहीं हूं,
मैं कठपुतली की तरह नचाई गई हूं ।
मिला है सिला मोहब्बत का मुझको,
कि महलों के कोठों पर लाई गई हूं ।
उसी ने मुझ को दाव पर लगाया,
जिसकी खातिर मैं बनाई गई हूं ।
किसी ने न समझा मेरी जिंदगी को,
चटाई समझकर बिछाई गई हूं ।
पड़ी जब मेरी जरूरत किसी को,
मैं सोते से अक्सर जगाई गई हूं ।
मेरे दम कदम से है खुशियां तुम्हारी,
मैं खुशियों के खातिर जलाई गई हूं ।
उठा न सकी कभी मैं सर ही अपना,
लड़कपन में इतना झुकाई गई हूं ।
किया जब भी मैंने तकाजा वफा का,
तो शौहर के हाथों पिटाई गई हूं ।
तुम्हारी खताओं के बदले अक्सर,
मैं बलि का बकरा बनाई गई हूं ।
खता क्या है मेरी आंसू बताओ,
जमाने में अक्सर सताई गई हूं ।
