Sunday, 3 September 2017

औरत की कहानी औरत की जुबानी

Rochak Stories









मोहब्बत की खातिर बनाई गई हूं,
दहेज की खातिर जलाई गई ।

मैं परदे से महफिल में लाई गई हूं,
मैं औरों की खातिर बनाई गई हूं ।

उठाती में उंगली कैसे किसी पर,
मैं सबकी नजर में गिराई गई हूं ।

मैं अपनी मर्जी की मालिक नहीं हूं,
मैं कठपुतली की तरह नचाई गई हूं ।

मिला है सिला मोहब्बत का मुझको,
कि महलों के कोठों पर लाई गई हूं  ।

उसी ने मुझ को दाव पर लगाया,
जिसकी खातिर मैं बनाई गई हूं ।

किसी ने न समझा मेरी जिंदगी को,
चटाई समझकर बिछाई गई हूं ।

पड़ी जब मेरी जरूरत किसी को,
मैं सोते से अक्सर जगाई गई हूं  ।

मेरे दम कदम से है खुशियां तुम्हारी,
मैं खुशियों के खातिर जलाई गई हूं ।

उठा न सकी कभी मैं  सर ही अपना,
लड़कपन में इतना  झुकाई गई हूं ।

किया जब भी  मैंने तकाजा वफा का,
तो शौहर के हाथों पिटाई गई हूं ।

तुम्हारी खताओं के बदले अक्सर,
मैं बलि का बकरा बनाई गई हूं ।

खता क्या है मेरी आंसू बताओ,
जमाने में अक्सर सताई गई हूं ।

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